Umesh Purushottam Bhiwapurkar
📍 Umred
स्कूल की मासूम जिंदगी के पडाव में दोस्तों के साथ वो 7 साल कैसे निकल गए पता ही नहीं चला! अब भी ऐसा ही लगता है कि कल ही की तो बात है...; हमारे बच्चे तो बड़े हो गए हैं, फिर भी नवोदय में आने फिर से हम बच्चे बन जाते है l
दोस्त
एक ऐसा चोर होता है; जो आँखों से आँसू, चेहरे से परेशानी, दिल से मायूसी, ज़िंदगी से दर्द, और बस चले तो... हाथों की लकीरों से मौत तक चुरा ले।
कभी कभी तो यादें इतना परेशान करती है कि लगता है...
यें ख़ामोश सें लम्हें..,
यें बारिशों क़े दिंन..!
तुम्हें याद करतें करतें..,
एक़ और चाय तुम्हारें बिन..!!
साथियों
एक दिन यूँ ही
हम सब बिछड़ जाएंगे
न गलती, न झगड़ा
बस ये जिद
"वो याद नहीं करता
तो मैं क्यों करूं?"
और इसी खामोशी के बीच
अपनेपन दम तोड़ जाएंगे!!!
So dear all Stay connected ...🙏🏻